एनीमेशन :भविष्य की डिजिटल दुनिया को रिप्रेजेंट करने का एक उन्नत तरीका, और एनीमेशन की बढ़ती डिमांड

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3D Animation

पिछले कुछ सालों में एनीमेशन 3D Animation को लेकर यूथ्स  में काफी जागरूकता आई है। कॉलेज में पढाई करने के साथ-साथ युथ एनिमेशन का कोर्स करने में भी दिलचस्पी दिखा रहें हैं। विज्ञापन हो या फिल्म आज सभी में एनिमेशन से सम्बंधित काम हो रहैं  है, ऎसे में युवाओं के लिए रोजगार के दरवाजे खुलते जा रहे  हैं।  इन दिनों 3डी एनिमेशन का काम जोरों से चल रहा है। 3डी यानी 3डायमेंन्शनल फिल्म। 3डी एनिमेशन फिल्में आज के दौर में ज्यादा पसंद की जा रही हैं, हालांकि इन्हे बनाना थोडा मंहगा है, लेकिन दर्शक यदि चाह रहे है तो उन्हीं के अनुसार चलना होगा। यह तय है कि आने वाला समय 3डी का ही होगा। जैम कैमरून की फिल्म अवतार और हैरी पॉटर की आखरी किस्त को भारत में मिली आपार सफलता इसकी गवाही दे रहीं है।

3D Animation

 

एनीमेशन का इतिहास

एनीमेशन शब्द को एक ग्रीक शब्द “एनियेयर” से लिया गया हैं जिसका मतलब है “जीवन देना”। एनीमेशन बिल्कुल यही है – जीवन या आंदोलन, गति या अन्यथा निर्जीव वस्तु के लिए एक आवाज, एनीमेशन स्थिर चित्रों की एक श्रृंखला है जो तेजी से उत्तराधिकार में दिखाए जाते हैं। जो कि एक चलती हुई चित्र का भ्रम पैदा करता है, अगर हम कई छवियों (24 चित्र प्रति सेकेंड) को देखते हैं और वो सभी चित्र एक दूसरे से सभी लिंक होती है। विभिन्न प्रकार के एनीमेशन होते है -जैसे कंप्यूटर गेम:- कब्र रेडर और फ्रॉगर जैसे खेलों के लिए एनिमेशन का उपयोग करते हैं, कार्टून और सेटिंग्स सभी एनिमेटेड होते हैं। सेल एनीमेशन एक प्रक्रिया है जो बहुत सारी फोटोज को एक अनुक्रम में सेट करके और उन्हें एक साथ जोड़ते है जिससे उन फोटोज से एक चलती हुई फोटो बन सके जिसे हम एनिमेटेड फोटो कहते है। यह एक पुरानी प्रक्रिया है जो आज भी सिनेमा, टेलीविजन और कंप्यूटर के लिए एनीमेशन बनाने के लिए उपयोग की जाती है। सेल एनीमेशन का उदाहरण सुपरमैन जैसे कार्यक्रमों में है। एनीमेशन कट-आउट भी एक तकनीक है जो सेल प्रक्रिया से तेज़ है। किसी जानवर या व्यक्ति के शरीर के कुछ हिस्सों में कटौती की जाती है और फिर उन पर कुछ रंग किये जाते हैं, फिर उन सभी पार्ट्स को बार बार जोड़ा जाता हैं। और बार-बार से खींचे जाने के बजाय अलग-अलग पदों में पुन: संयोजन किया जाता है।
एनीमेशन ने 1900 के बाद से बहुत कुछ विकसित किया है, पहली एनिमेटेड फीचर फिल्म कोहल और जॉर्ज मेलीज़ द्वारा 1918 में बनाई गई थी। कुछ एनीमेशन इससे पहले भी देखे गए, जो 1910 से पहले ही सरल ड्राइंग से बनाये जाते थे जिसमे एक ही समय पर बहुत सारी फोटोज दिखाई देती थी। 1913 के आसपास सेल्यूलॉयड शुरू किया गया, जिसने जल्दी से एनीमेशन को प्रबंधित करना आसान बना दिया था जिससे कई चित्र बनाने के बजाय एक जटिल पृष्ठभूमि का उपयोग किया जा सकता था। वॉल्ट डिज़नी स्टीमबोट विली के प्रीमियर के साथ अपनी फिल्म कार्टून में ध्वनि जोड़ने वाले पहले व्यक्ति थे। फिर 1937 में उन्होंने पहली फीचर लम्बी फिल्म “स्नो वाइट” और “दि सेवन ड्वार्फस” का उत्पादन किया। एनीमेशन केवल आंदोलन का भ्रम है, जो त्वरित-चलती छवियों के उत्तराधिकार से उत्पन्न होता है यह दोनों 2 डी और 3 डी के प्रारूप में हो सकता है और कई माध्यमों पर ले जाता है। आज, एनिमेटरों के चित्र और पृष्ठभूमि को या तो कंप्यूटर सिस्टम में स्कैन या सीधे खींचा जाता है।
90 के दशक  में टॉय स्टोरी नाम की मूवी आई थी, इसे स्लिवर स्क्रीन पर आई पहली 3डी मूवी माना जाता है, इस फिल्म में 3डी एनिमेशन के कारण खूब नाम कामाया था। इसके बाद आई जुरासिक पार्क इस फिल्म में डायनासॉर को बेहतर तरीके से पेश कर कमाई के मामले में इतिहास बना डाला। दौर यहीं खत्म नहीं हुआ, कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री भी इस क्षेत्र में कदम रखने को बेताब है।

3D Animation

भारत में 3डी क्वालिटी  फिल्म की संभावना को देखते हुए पिक्सन और रिच और होज जैसे इंटरनैशनल ब्रांड ने अपना स्डूडीयो खोला है। 3डी फिल्मों की दुनिया भर में बढती मांग को देखते हुए भारतीय उद्योगपति अनिल अंबानी की रिलायंस एजीएजी ग्रुप ने अमेरीक कंपनी ने इन तीन के साथ साझेदारी की है इसके अलावा और भी बहुत सारी कंपनियां हैं जो 3डी मूवी बनाती है।

एक एनीमेशन बनाने से पहले एनीमेटर के पास एनीमेशन के नियमों का ज्ञान होना बहुत जरूरी है, जो दुनिया भर के एनिमेटरों के पास होता है और उन नियमो का पालन करें। एनीमेशन का पहला नियम यह है कि एक एनीमेटर को अच्छी तरह से एनीमेशन के एकल कोशिकाओं का निर्माण करने वाली तकनीक को समझना चाहिए। दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण

नियम:-

एनीमेटर के पास धैर्य होना चाहिए, ताकि उसे तड़का हुआ(भड़कीला) या जितना स्मूथ दिखना चाहिए उतना स्मूथ नहीं दिखने से रोक सकें। आखिरकार, एनीमेटर से क्या चाहिए होता है
1. एनिमेटर अपने ताजा विचारों के साथ एनीमेशन के आधार को जीवित रखने लिए प्रयास करते है और काफी मेहनत करते है।
2. यह एनीमेशन का नियम नहीं है, लेकिन अक्सर दुनिया भर के एनिमेटरों को यह सिखाया जाता है कि “एनिमेशन को अक्सर सिखाया जाता था कि एनीमेशन केवल इसके रचनाकारों की कल्पना और कौशल के द्वारा सीमित है”।
3. इन नियमों का उपयोग करते हुए, एनीमेशन कंपनियां उन कलाकारों को जॉब ऑफर करती है, जो पहले बताये गए नियमों से परिचित हैं। लेकिन एक पूर्ण लम्बी एनीमेशन बनाने के लिए आपको इन नियमों से अधिक जानकारी की आवश्यकता है। आपको नीचे एक पूर्ण लंबाई एनीमेशन बनाने की प्रक्रिया की सुविधा के बारे में विस्तार से समझाया जायेगा। एक पारंपरिक एनीमेशन बनाने के लिए सहकारी कलाकारों और संपादकों की एक टीम की आवश्यकता होती है। यह एक सामूहिक, रचनात्मक दृष्टिकोण की भी मांग करता है, जिसके भीतर अंतिम उत्पाद सफल होने के लिए टीम के व्यक्तिगत कलाकारों और संपादकों को अच्छी तरह से मिलना चाहिए और टीम के बाकि लोगो से संवाद करना चाहिए। क्योंकि बहुत से लोग एक छोटी सी एनिमेटेड फिल्म का एक टुकड़ा तैयार करने में लगे हुए हुए हैं। एनिमेटेड फिल्म का निर्माण बहुत महंगा होता है, कंपनियों को एनिमेटोरो की एक टीम बनानी चाहिए जो उत्पाद को पहले पूरा करने के लिए मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं।

एनीमेशन 3D Animation में सफलता-

एनीमेशन कोर्स पूरा हो जाने के बाद आप एक एनीमेटर विज्ञापन, वेब डिजाइनिंग, वीडियो बनाने, संपादन, खेल के विकास और यहां तक ​​कि फिल्म उद्योग में भी जा सकते है। विशेष प्रभाव, जो अब फिल्म बनाने का एक महत्वपूर्ण पहलू है, एनीमेशन पाठ्यक्रमों में सिखाया गया 2 डी और 3 डी तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व है।

भारत में एनीमेशन का भविष्य और इसके लाभ-

3D Animation

एनिमेशन मनोरंजन और आईटीईएस (सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाएं) उद्योगों का एक अभिन्न अंग है। सफलतापूर्वक 2 डी और 3 डी एनीमेशन कक्षाएं पूरी करने के उम्मीदवार को अपने कौशल और ज्ञान का परीक्षण करने के लिए एक विशाल अवसर मिलता हैं। भारत में मनोरंजन उद्योग जिसमें फिल्मों और टेलीविज़न शामिल हैं, दुनिया में अग्रणी हैं और इच्छुक एनीमेटरों के लिए एक परीक्षण क्षेत्र हैं। भारतीय फिल्मों और टेलीविज़न शो में विशेष प्रभावों का इस्तेमाल धीरे-धीरे बढ़ रहा है। केवल प्रशिक्षित एनिमेटर्स ही आकर्षक विशेष प्रभाव बनाने में सक्षम हैं जैसा की हम स्क्रीन पर देखते हैं।
मनोरंजन के अलावा, विज्ञापन एक ऐसा क्षेत्र है जहां एनीमेशन बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। आकर्षक विज्ञापनों में से अधिकांश शानदार एनीमेशन तकनीकों के काम हैं। दोनों 2 डी और 3 डी तकनीकों का उपयोग टेलीविजन या वेब आधारित विज्ञापन बनाने में किया जाता है। विज्ञापन केवल टेलीविजन तक ही सीमित नहीं है बल्कि वेब पर बड़े पैमाने पर फैली हुई है। इंटरनेट दुनिया भर में लोगों के बीच जानकारी, चित्र, वीडियो और संदेशों को साझा करने का एक मंच है। एक सफलतापूर्वक वेब पेज एनीमेशन दुनिया भर के लाखों दर्शकों को आकर्षित करने के लिए निश्चित है।

हॉलीवुड से बॉलीवुड फिल्मों और अन्य इंडस्ट्री में भारतीय 3डी एनिमेटर्स की खूब मांग है, एडोब फोटोशॉप ओटोडेस्क माया, ओटोडेस्क मडबॉक्स, इयोन फ्योजन, एप्पल फाइनल कट प्रो, ओटोडेस्क मैचओवर में पारंगत बनाया जाता है। इसके अलावा इंटरनेट से कई इंस्टीटयुट और उनके कोर्सस के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है। एक बार कोर्स पूरा कर लेने के बाद पैकेज को लेकर युथ को चिंता करने की जरूरत नहीं होती है।

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